Type-2 Diabetes: बच्चों में बढ़ता डायबिटीज का खतरा, क्या आपका बच्चा भी है इसका शिकार?

टाइप-2 डायबिटीज आमतौर पर वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले बच्चों में ज्यादातर टाइप-1 डायबिटीज के मामले देखने को मिलते थे, लेकिन अब टाइप-2 डायबिटीज भी एक बढ़ता हुआ खतरा बन चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में डायबिटीज का मुख्य कारण बढ़ता मोटापा, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और आहार है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज एक क्रॉनिक बीमारी है, जिसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह आंखों, किडनी और तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। बढ़ते मोटापे के मामलों ने बच्चों में इस बीमारी के खतरे को बढ़ा दिया है, खासकर उन बच्चों में जिनके परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा हो।

यदि बच्चे को बार-बार प्यास लगना, अक्सर थकान महसूस होना, धुंधला दिखना, या बिना किसी शारीरिक मेहनत के वजन कम होना जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो ये डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे का ब्लड शुगर लेवल भी अगर लगातार बढ़ा रहता है, तो इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

बच्चों को टाइप-2 डायबिटीज से बचाने के लिए उन्हें स्वस्थ आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें। कम फैट और कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ, फलों और सब्जियों को आहार में शामिल करें, और बच्चों को शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। साथ ही, स्क्रीन टाइम को घटाकर शारीरिक खेलों और व्यायाम को बढ़ावा दें।

अगर आपके बच्चे में इन लक्षणों में से कोई भी लक्षण दिखता है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच करवाना बेहद जरूरी है।

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